शराब के नशे में गाड़ी चलाना एक गंभीर अपराध है। इसमें मौके पर ऑनलाइन चालान नहीं भर सकते; गाड़ी जब्त होती है और अनिवार्य रूप से अदालत के समक्ष पेश होना पड़ता है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- मोटर वाहन अधिनियम धारा 185 के तहत प्रति 100 मिलीलीटर रक्त में 30 मिलीग्राम (30mg/100ml) से अधिक अल्कोहल पाए जाने पर अपराध।
- पहली बार पकड़े जाने पर ₹10,000 का जुर्माना और/या 6 महीने तक की जेल की सजा।
- दूसरी बार पकड़े जाने पर ₹15,000 का जुर्माना और/या 2 साल तक की जेल।
- चालक का ड्राइविंग लाइसेंस कम से कम 3 महीने के लिए अनिवार्य रूप से निलंबित (Suspended) कर दिया जाता है।
1. ड्रंक एंड ड्राइव मामले में अदालती प्रक्रिया
- पुलिस ब्रीथ एनालाइजर (Breath Analyzer) टेस्ट की प्रिंटेड पर्ची चालान के साथ संलग्न करती है
- गाड़ी को थाने में सीज कर दिया जाता है और किसी अन्य सामान्य (Sober) व्यक्ति को हैंडओवर किया जा सकता है
- तय तारीख पर मजिस्ट्रेट कोर्ट में पेश होकर वकील के माध्यम से जुर्माना भरना होता है
- कोर्ट से रिलीज आर्डर (Superdari / Release Order) लेकर थाने से गाड़ी छुड़ाई जाती है
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: क्या पुलिस जबरन खून का टेस्ट (Blood Test) करा सकती है?
A: हां, यदि चालक ब्रीथ एनालाइजर टेस्ट देने से मना करे, तो पुलिस उसे निकटतम सरकारी अस्पताल ले जाकर डॉक्टर से ब्लड टेस्ट करा सकती है।
Q: क्या ड्रंक एंड ड्राइव में बीमा क्लेम मिलता है?
A: नहीं! यदि दुर्घटना के समय चालक शराब के नशे में था, तो बीमा कंपनी वाहन क्षति (Own Damage) का क्लेम पूरी तरह खारिज कर देती है।