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Police & Criminal Law 5 min read • Oct 07, 2026 • 2,502 Views

धारा 498A (दहेज प्रताड़ना) व BNS 85/86 का झूठा केस होने पर क्या करें? बिना गिरफ्तारी के कानूनी बचाव

झूठे दहेज और घरेलू हिंसा के मुकदमे में पूरे परिवार का नाम आने पर घबराएं नहीं: सुप्रीम कोर्ट का अरणेश कुमार जजमेंट, मीडिएशन प्रक्रिया और एफआईआर क्वैश कराने के तरीके।

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Legal & Public Rights Desk
ShayariManch Literature Contributor
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धारा 498A (दहेज प्रताड़ना) व BNS 85/86 का झूठा केस होने पर क्या करें? बिना गिरफ्तारी के कानूनी बचाव

वैवाहिक विवादों में अक्सर आपसी मनमुटाव के चलते पति, सास, ससुर और ननद पर दहेज प्रताड़ना (498A IPC / BNS धारा 85-86) का झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया जाता है। कानून निर्दोषों को पूर्ण सुरक्षा देता है।

📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)

  • सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशानुसार 498A के मामले में पुलिस सीधे परिवार के किसी भी सदस्य को गिरफ्तार नहीं कर सकती।
  • थाने में मामला जाते ही सबसे पहले परिवार परामर्श केंद्र (Crime Against Women Cell) में मीडिएशन कराया जाता है।
  • दूर रहने वाले सास-ससुर और रिश्तेदारों का नाम हटाने के लिए हाईकोर्ट में धारा 528 BNSS के तहत Quashing याचिका।
  • झूठे आरोपों के खिलाफ पति की ओर से अग्रिम जमानत और अपने बचाव के डिजिटल सबूत (चैट, बैंक स्टेटमेंट) सुरक्षित रखना।

1. झूठे 498A केस से बचाव की 4-सूत्रीय रणनीति

  • पुलिस नोटिस (Section 35 BNSS) का सम्मान करें और सभी साक्ष्यों के साथ जांच अधिकारी को बयान दें
  • परिवार परामर्श केंद्र (CAW Cell) में समझौता वार्ता में हिस्सा लें और बातचीत का रिकॉर्ड रखें
  • यदि पत्नी मायके से गहने और सामान खुद लेकर गई है, तो थाने में पहले से दी गई सूचना की पावती साथ रखें
  • झूठे आरोपों पर हाईकोर्ट से पूरे परिवार के लिए नो-कोअर्सिव (No Coercive Action) आदेश प्राप्त करें
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q: क्या 498A में समझौते पर केस खत्म हो सकता है?

A: हां, दोनों पक्षों में समझौता होने पर हाईकोर्ट में संयुक्त याचिका लगाकर एफआईआर और चार्जशीट को पूरी तरह निरस्त कराया जा सकता है।

Q: झूठा केस करने वाली पत्नी पर क्या कानूनी कार्रवाई हो सकती है?

A: बरी होने के बाद पति BNS की धारा 248 (झूठा आरोप लगाना) और मानहानि (Defamation) का मुकदमा कर भारी हर्जाना मांग सकता है।

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