वैवाहिक विवादों में अक्सर आपसी मनमुटाव के चलते पति, सास, ससुर और ननद पर दहेज प्रताड़ना (498A IPC / BNS धारा 85-86) का झूठा मुकदमा दर्ज करा दिया जाता है। कानून निर्दोषों को पूर्ण सुरक्षा देता है।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- सुप्रीम कोर्ट के सख्त आदेशानुसार 498A के मामले में पुलिस सीधे परिवार के किसी भी सदस्य को गिरफ्तार नहीं कर सकती।
- थाने में मामला जाते ही सबसे पहले परिवार परामर्श केंद्र (Crime Against Women Cell) में मीडिएशन कराया जाता है।
- दूर रहने वाले सास-ससुर और रिश्तेदारों का नाम हटाने के लिए हाईकोर्ट में धारा 528 BNSS के तहत Quashing याचिका।
- झूठे आरोपों के खिलाफ पति की ओर से अग्रिम जमानत और अपने बचाव के डिजिटल सबूत (चैट, बैंक स्टेटमेंट) सुरक्षित रखना।
1. झूठे 498A केस से बचाव की 4-सूत्रीय रणनीति
- पुलिस नोटिस (Section 35 BNSS) का सम्मान करें और सभी साक्ष्यों के साथ जांच अधिकारी को बयान दें
- परिवार परामर्श केंद्र (CAW Cell) में समझौता वार्ता में हिस्सा लें और बातचीत का रिकॉर्ड रखें
- यदि पत्नी मायके से गहने और सामान खुद लेकर गई है, तो थाने में पहले से दी गई सूचना की पावती साथ रखें
- झूठे आरोपों पर हाईकोर्ट से पूरे परिवार के लिए नो-कोअर्सिव (No Coercive Action) आदेश प्राप्त करें
किसी भी कानूनी, दस्तावेजी या जमीनी समस्या के लिए विशेषज्ञ विधिक राय लें
जमीन विवाद, नामांतरण (दाखिल-खारिज), अवैध कब्जा, पुलिस शिकायत, एफआईआर, चेक बाउंस, बैंक खाता फ्रीज या कोर्ट केस में एडवोकेट संजय यादव से सही कानूनी मार्गदर्शन और सटीक समाधान प्राप्त करें।
❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: क्या 498A में समझौते पर केस खत्म हो सकता है?
A: हां, दोनों पक्षों में समझौता होने पर हाईकोर्ट में संयुक्त याचिका लगाकर एफआईआर और चार्जशीट को पूरी तरह निरस्त कराया जा सकता है।
Q: झूठा केस करने वाली पत्नी पर क्या कानूनी कार्रवाई हो सकती है?
A: बरी होने के बाद पति BNS की धारा 248 (झूठा आरोप लगाना) और मानहानि (Defamation) का मुकदमा कर भारी हर्जाना मांग सकता है।