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Police & Criminal Law 5 min read • Oct 07, 2026 • 2,501 Views

सरकारी कर्मचारी या पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR कैसे कराएं? धारा 218 BNSS (197 CrPC) व कोर्ट आदेश

भ्रष्ट या अत्याचारी सरकारी अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के नियम: पूर्व अभियोजन स्वीकृति (Sanction for Prosecution), भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और कोर्ट इस्तगासा।

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Legal & Public Rights Desk
ShayariManch Literature Contributor
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सरकारी कर्मचारी या पुलिस अधिकारी के खिलाफ FIR कैसे कराएं? धारा 218 BNSS (197 CrPC) व कोर्ट आदेश

अक्सर लोगों को लगता है कि सरकारी बाबू या पुलिस अधिकारी के खिलाफ कानून काम नहीं करता। सच्चाई यह है कि वर्दी या पद की आड़ में किया गया कोई भी अपराध कानून से ऊपर नहीं है।

📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)

  • शासकीय कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए कार्यों के लिए धारा 218 BNSS (पुरानी 197 CrPC) के तहत सरकार से पूर्व स्वीकृति जरूरी।
  • लेकिन रिश्वत लेना, मारपीट करना, हिरासत में प्रताड़ना या बलात्कार करना शासकीय कर्तव्य नहीं है; इसमें बिना मंजूरी सीधे एफआईआर होती है।
  • विजिलेंस, लोकायुक्त या एंटी-करप्शन ब्यूरो (ACB) में सीधे भ्रष्ट अधिकारी की शिकायत दर्ज कराएं।
  • मजिस्ट्रेट कोर्ट में धारा 175(3) BNSS के तहत अर्जी देकर सीधे अधिकारी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जा सकता है।

1. सरकारी अधिकारी के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया के 3 रास्ते

1. लोकायुक्त / एंटी करप्शन ब्यूरो

रिश्वत या आय से अधिक संपत्ति के मामलों में राज्य लोकायुक्त या विजिलेंस विभाग सीधे जांच और गिरफ्तारी करता है।

2. मानवाधिकार आयोग (NHRC / SHRC)

पुलिस द्वारा फर्जी एनकाउंटर, अवैध हिरासत या टॉर्चर करने पर मानवाधिकार आयोग तुरंत नोटिस और मुआवजा दिलाता है।

3. हाईकोर्ट में रिट याचिका (Writ Petition)

संविधान के अनुच्छेद 226 के तहत हाईकोर्ट सीधे सीबीआई जांच या निष्पक्ष एसआईटी का गठन कर सकती है।

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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q: क्या थाना प्रभारी अपने ही सिपाही के खिलाफ एफआईआर लिखेगा?

A: यदि थाना मना करे तो सीधे एसपी को रजिस्टर्ड डाक भेजें और मजिस्ट्रेट कोर्ट में प्राइवेट कंप्लेंट (इस्तगासा) दाखिल करें।

Q: अभियोजन स्वीकृति (Sanction) में कितना समय लगता है?

A: विनीत नारायण जजमेंट के अनुसार सक्षम प्राधिकारी को 3 महीने के भीतर स्वीकृति पर निर्णय लेना अनिवार्य है।

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