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Family & Marriage 5 min read • Oct 07, 2026 • 2,501 Views

अंतरजातीय व प्रेम विवाह सुरक्षा: ऑनर किलिंग के खतरे से बचाव व हाईकोर्ट से पुलिस प्रोटेक्शन याचिका

परिवार के विरोध और जान के खतरे के बीच बालिग जोड़े कैसे पाएं कानूनी सुरक्षा? संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन की रक्षा और शक्ति वाहिनी जजमेंट।

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Legal & Public Rights Desk
ShayariManch Literature Contributor
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अंतरजातीय व प्रेम विवाह सुरक्षा: ऑनर किलिंग के खतरे से बचाव व हाईकोर्ट से पुलिस प्रोटेक्शन याचिका

भारत का संविधान प्रत्येक बालिग नागरिक को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का मौलिक अधिकार देता है। परिवार या खाप पंचायतें बालिग जोड़े को डरा-धमका नहीं सकतीं।

📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)

  • सुप्रीम कोर्ट के 'शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ' फैसले के अनुसार बालिग युगल की पसंद में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
  • शादी या लिव-इन के तुरंत बाद हाईकोर्ट में अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका (Protection Petition) दाखिल की जाती है।
  • हाईकोर्ट संबंधित जिले के एसपी और थाना प्रभारी को युगल को तत्काल 24 घंटे सुरक्षा देने का आदेश जारी करती है।
  • युगल के खिलाफ लड़की के परिवार द्वारा दर्ज कराई गई झूठी अपहरण (Kidnapping) की एफआईआर पर कोर्ट रोक लगाती है।

1. हाईकोर्ट से सुरक्षा पाने के लिए जरूरी दस्तावेज

  • लड़के और लड़की दोनों का आयु प्रमाण (10वीं मार्कशीट, आधार कार्ड या पैन कार्ड)
  • विवाह का प्रमाण (आर्य समाज मैरिज सर्टिफिकेट या कोर्ट मैरिज की रसीद)
  • परिवार द्वारा दी गई धमकी के साक्ष्य (कॉल रिकॉर्डिंग, चैट या लिखित विवरण)
  • जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) को डाक/ईमेल से पहले भेजी गई सुरक्षा मांग की प्रति
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q: सुरक्षा याचिका में कितना समय लगता है?

A: याचिका दाखिल होने के 24 से 48 घंटे के भीतर हाईकोर्ट में हियरिंग होती है और उसी दिन प्रोटेक्शन ऑर्डर पास हो जाता है।

Q: क्या पुलिस लड़की को जबरन परिजनों को सौंप सकती है?

A: बिल्कुल नहीं, बालिग लड़की अपनी मर्जी से जहां चाहे वहां रहने के लिए स्वतंत्र है; पुलिस या परिजन उसे विवश नहीं कर सकते।

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