भारत का संविधान प्रत्येक बालिग नागरिक को अपनी पसंद से जीवनसाथी चुनने का मौलिक अधिकार देता है। परिवार या खाप पंचायतें बालिग जोड़े को डरा-धमका नहीं सकतीं।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- सुप्रीम कोर्ट के 'शक्ति वाहिनी बनाम भारत संघ' फैसले के अनुसार बालिग युगल की पसंद में कोई हस्तक्षेप नहीं कर सकता।
- शादी या लिव-इन के तुरंत बाद हाईकोर्ट में अनुच्छेद 226 के तहत रिट याचिका (Protection Petition) दाखिल की जाती है।
- हाईकोर्ट संबंधित जिले के एसपी और थाना प्रभारी को युगल को तत्काल 24 घंटे सुरक्षा देने का आदेश जारी करती है।
- युगल के खिलाफ लड़की के परिवार द्वारा दर्ज कराई गई झूठी अपहरण (Kidnapping) की एफआईआर पर कोर्ट रोक लगाती है।
1. हाईकोर्ट से सुरक्षा पाने के लिए जरूरी दस्तावेज
- लड़के और लड़की दोनों का आयु प्रमाण (10वीं मार्कशीट, आधार कार्ड या पैन कार्ड)
- विवाह का प्रमाण (आर्य समाज मैरिज सर्टिफिकेट या कोर्ट मैरिज की रसीद)
- परिवार द्वारा दी गई धमकी के साक्ष्य (कॉल रिकॉर्डिंग, चैट या लिखित विवरण)
- जिले के पुलिस अधीक्षक (SP) को डाक/ईमेल से पहले भेजी गई सुरक्षा मांग की प्रति
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: सुरक्षा याचिका में कितना समय लगता है?
A: याचिका दाखिल होने के 24 से 48 घंटे के भीतर हाईकोर्ट में हियरिंग होती है और उसी दिन प्रोटेक्शन ऑर्डर पास हो जाता है।
Q: क्या पुलिस लड़की को जबरन परिजनों को सौंप सकती है?
A: बिल्कुल नहीं, बालिग लड़की अपनी मर्जी से जहां चाहे वहां रहने के लिए स्वतंत्र है; पुलिस या परिजन उसे विवश नहीं कर सकते।