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Family & Marriage 5 min read • Oct 07, 2026 • 2,501 Views

लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) के कानूनी नियम: भरण-पोषण, बच्चों के अधिकार व पुलिस सुरक्षा

भारत में बिना शादी साथ रहने के कानूनी अधिकार: सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले, लिव-इन पार्टनर को घरेलू हिंसा कानून का संरक्षण और पैदा हुए बच्चों का संपत्ति में हक।

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Legal & Public Rights Desk
ShayariManch Literature Contributor
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लिव-इन रिलेशनशिप (Live-in Relationship) के कानूनी नियम: भरण-पोषण, बच्चों के अधिकार व पुलिस सुरक्षा

सर्वोच्च न्यायालय के कई निर्णयों के अनुसार दो बालिग व्यक्तियों का आपसी सहमति से बिना विवाह एक साथ रहना (Live-in Relationship) कोई अपराध या गैर-कानूनी कृत्य नहीं है।

📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)

  • लंबे समय तक साथ रहने पर कानून इसे विवाह के समतुल्य (Presumption of Marriage) मानता है।
  • महिला पार्टनर को घरेलू हिंसा अधिनियम 2005 के तहत संरक्षण और धारा 144 BNSS में भरण-पोषण का पूर्ण अधिकार।
  • लिव-इन रिलेशनशिप से जन्मे बच्चों को 100% वैध (Legitimate) माना जाता है और उन्हें माता-पिता की संपत्ति में पूरा हक मिलता है।
  • परिवार या समाज से जान का खतरा होने पर हाईकोर्ट से तत्काल पुलिस सुरक्षा (Protection Petition) प्राप्त की जा सकती है।

1. सुप्रीम कोर्ट द्वारा तय 4 लिव-इन मानदंड

  • दोनों का बालिग होना (पुरुष 21+, महिला 18+) और सहमति से संबंध में रहना
  • पति-पत्नी की तरह एक ही छत के नीचे लंबे समय तक रहना
  • समाज में स्वयं को एक युगल (Couple) के रूप में प्रस्तुत करना
  • पहले से किसी अन्य व्यक्ति से वैध विवाह का जीवित न होना
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q: क्या लिव-इन में ब्रेकअप होने पर महिला मेंटेनेंस मांग सकती है?

A: हां, यदि वे लंबे समय तक पति-पत्नी की तरह रहे हैं, तो महिला धारा 144 BNSS के तहत भरण-पोषण पाने की हकदार है।

Q: क्या कुछ राज्यों में लिव-इन का पंजीकरण अनिवार्य है?

A: उत्तराखंड के समान नागरिक संहिता (UCC) जैसे कुछ नए कानूनों में लिव-इन का 1 महीने में पंजीकरण अनिवार्य किया गया है।

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