कोई भी पति अपनी कानूनी रूप से विवाहित पत्नी और नाबालिग बच्चों को बेसहारा नहीं छोड़ सकता।
📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)
- धारा 125 के तहत भरण-पोषण प्राप्त करना पत्नी का वैधानिक अधिकार है।
- पति की कुल शुद्ध आय का 20 से 25 प्रतिशत तक भरण-पोषण तय होता है।
- दोनों पक्षों को अदालत में अपनी आय व संपत्तियों का विस्तृत शपथ पत्र देना अनिवार्य।
1. किन परिस्थितियों में भरण-पोषण मिलता है?
- पति द्वारा बिना कारण छोड़ दिया जाना या क्रूरता
- पत्नी के पास आजीविका का स्वतंत्र साधन न होना
- नाबालिग बच्चों की पढ़ाई और लालन-पालन का खर्च
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q: क्या कामकाजी पत्नी को भी भरण-पोषण मिल सकता है?
A: यदि पत्नी की आय पति के रहन-सहन के स्तर को बनाए रखने के लिए अपर्याप्त है, तो आंशिक गुजारा भत्ता मिल सकता है।