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Police & Criminal Law 5 min read • Oct 07, 2026 • 2,501 Views

पुलिस कस्टडी और ज्यूडिशियल कस्टडी में क्या अंतर है? 24 घंटे में मजिस्ट्रेट पेशी और रिमांड नियम

थाने के लॉकअप और जेल में क्या फर्क होता है? बीएनएसएस धारा 187 के तहत 15 दिन की पुलिस रिमांड, थर्ड डिग्री टॉर्चर से सुरक्षा और मेडिकल जांच के अनिवार्य नियम।

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Legal & Public Rights Desk
ShayariManch Literature Contributor
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पुलिस कस्टडी और ज्यूडिशियल कस्टडी में क्या अंतर है? 24 घंटे में मजिस्ट्रेट पेशी और रिमांड नियम

गिरफ्तारी के बाद आरोपी को पुलिस हिरासत में रखा जाएगा या जेल भेजा जाएगा, इसका फैसला केवल अदालत करती है। दोनों कस्टडी के नियम और अधिकार पूरी तरह अलग हैं।

📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)

  • संविधान के अनुच्छेद 22(2) के अनुसार किसी भी गिरफ्तार व्यक्ति को 24 घंटे के भीतर मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य।
  • पुलिस कस्टडी (Police Remand) में आरोपी थाने के लॉकअप में रहता है और पुलिस उससे पूछताछ करती है।
  • ज्यूडिशियल कस्टडी (Judicial Remand) में आरोपी सीधे जेल अधीक्षक की देखरेख में जेल में रहता है।
  • हर 48 घंटे में आरोपी का सरकारी डॉक्टर से मेडिकल परीक्षण कराना अनिवार्य है (डी.के. बसु गाइडलाइंस)।

1. पुलिस और न्यायिक हिरासत का तुलनात्मक चार्ट

मापदंड पुलिस कस्टडी (Police Custody) ज्यूडिशियल कस्टडी (Judicial Custody)
स्थान थाने का लॉकअप / पुलिस पूछताछ रूम केंद्रीय या जिला कारागार (Jail)
पूछताछ का अधिकार पुलिस सीधे पूछताछ कर सकती है पुलिस बिना कोर्ट की पूर्व अनुमति के जेल में पूछताछ नहीं कर सकती
सुरक्षा थर्ड डिग्री या दबाव का खतरा रहता है जेल नियमों और कोर्ट के सीधे संरक्षण में रहता है
अधिकतम अवधि नए कानून में शुरुआती 40-60 दिनों के भीतर कुल 15 दिन चार्जशीट तक (60 या 90 दिन) या जमानत मिलने तक
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q: यदि पुलिस 24 घंटे से अधिक समय तक थाने में बैठाए रखे तो?

A: यह अवैध हिरासत (Illegal Confinement) है। वकील तुरंत हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus) याचिका लगा सकता है।

Q: क्या पुलिस कस्टडी में वकील मिल सकता है?

A: हां, धारा 38 BNSS के अनुसार पूछताछ के दौरान आरोपी को अपने वकील से मिलने और दूर से देखने का पूर्ण अधिकार है।

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