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Police & Criminal Law 5 min read • Oct 07, 2026 • 2,501 Views

गवाह को धमकाने पर क्या करें? साक्षी संरक्षण योजना (Witness Protection Scheme) व अदालत में सुरक्षा

गवाही बदलने के लिए दबाव या जान से मारने की धमकी मिलने पर क्या करें? सुप्रीम कोर्ट द्वारा मान्य विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम 2018, पहचान छिपाने के अधिकार और पुलिस एस्कॉर्ट।

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Legal & Public Rights Desk
ShayariManch Literature Contributor
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गवाह को धमकाने पर क्या करें? साक्षी संरक्षण योजना (Witness Protection Scheme) व अदालत में सुरक्षा

आपराधिक न्याय व्यवस्था में गवाह अदालत की आंख और कान होते हैं। गवाहों को डराना या मुकरने (Hostile होने) पर मजबूर करना न्याय की हत्या है। कानून गवाहों को बुलेटप्रूफ सुरक्षा देता है।

📌 मुख्य बिंदु व विशेषताएं (Key Highlights)

  • सुप्रीम कोर्ट के 'महेंद्र चावला' फैसले के अनुसार विटनेस प्रोटेक्शन स्कीम 2018 देश का कानून है।
  • गवाह की जान को खतरे के आधार पर सुरक्षा को 3 श्रेणियों (Category A, B, C) में बांटा गया है।
  • सत्र न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली स्थायी समिति 48 घंटे में गवाह को सशस्त्र पुलिस गार्ड प्रदान करती है।
  • अदालत में इन-कैमरा ट्रायल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग और गवाह का नाम व पता सीलबंद रखने का प्रावधान।

1. गवाह को मिलने वाली प्रमुख कानूनी सुरक्षा सुविधाएं

  • 24 घंटे सशस्त्र पुलिस सुरक्षा कर्मी और घर के बाहर पुलिस पिकेट
  • कोर्ट आने-जाने के लिए सुरक्षित सरकारी वाहन और एस्कॉर्ट
  • गंभीर खतरे में फोन नंबर, पहचान बदलना और दूसरे सुरक्षित स्थान पर पुनर्वास (Relocation)
  • गवाही के दौरान आरोपी और गवाह के बीच स्क्रीन लगाना ताकि आरोपी गवाह को देख न सके
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❓ अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)

Q: गवाह को सुरक्षा मांगने के लिए कहां आवेदन करना होता है?

A: जिले के सक्षम प्राधिकारी (District and Sessions Judge) के समक्ष विटनेस प्रोटेक्शन फॉर्म भरकर अर्जी दाखिल की जाती है।

Q: गवाह को धमकाने वाले आरोपी की जमानत रद्द हो सकती है?

A: हां, गवाह को प्रभावित करने या धमकाने के साक्ष्य मिलते ही अदालत आरोपी की जमानत तुरंत रद्द कर उसे सीधे जेल भेज देती है।

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